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ख़ामोशी

Nik

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़ामोशी सर्वदा निशब्द - निशांत,
        
                                                    
                            
परन्तु कहना -सुनना होत नितांत;
हौले से ढल रात्रि होत निशा अंत,
कब उगा सूर्य हो जाती सुप्रभात।

कालचक्र के पथ पर पग चलित,
चित पट कब दीपक प्रज्ज्वलित;
ह्रदय शीतल निर्मल धारा अमृति
पुराना टूट गया नव हुआ निर्मित।
3 वर्ष पहले
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