ख़ामोशी सर्वदा निशब्द - निशांत,
परन्तु कहना -सुनना होत नितांत;
हौले से ढल रात्रि होत निशा अंत,
कब उगा सूर्य हो जाती सुप्रभात।
कालचक्र के पथ पर पग चलित,
चित पट कब दीपक प्रज्ज्वलित;
ह्रदय शीतल निर्मल धारा अमृति
पुराना टूट गया नव हुआ निर्मित।