वो बापू भी अपना निराला था
जो धोती कुर्ते वाला था
अरे हाँ वही जो गोल चश्मे वाला था
कितना वो मतवाला था
आजाद भारत का सपना जिसने पाला था
अंहिसा की नीती से अंग्रेजों को डरा डाला था
दुबली पतली कद काठी
हाथों मे थी उनके दांडी
जलाई उन्होंने शांति की बाती
संग थी उनके पूरे देश की आबादी
एक ही उनका नारा था
अहिंसा परमो धर्म हमारा था
सदैव सत्य की लौ को किया उज्जवल
स्वभाव से भी थे एक दम निर्मल
मन मे थे उनके राम बसते
करते थे वो प्यार सबसे
हर संस्कृति का वो थे सम्मान करते
रामराज्य के सपने थे आँखों मे बसते
अंतिम श्वास तक रहे वो सच की राह पे डटके
अंतिम शब्द भी उनके मुख से हे राम ही निकला.....
- निखिल कुमार "अंजान"
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