दर्द अपना बता सकता नहीं
यादें तुम्हारी भूला सकता नहीं
पिता होने का फ़र्ज़ तुमने बखूबी निभाया
उंगली पकड़ कर चलना सिखाया
पिता पुत्र के रिश्ते से बढ़कर
सखा होने का एहसास जगाया
मित्र बनकर जीवन का पाठ पढाया
कैसे भूलूं वो बातें और खूबसूरत यादें
जिनका एहसास तुमसे जुड़ा है
जब भी वो खूबसूरत पल याद आते हैं
छलक कर आंसू आँखे नम कर जाते हैं
तुम्हारा झुठा गुस्सा और सच्चा प्यार
मिस करता हूँ हर दिन और रात
जब भी तुम्हारी याद आती है
अतीत की गहराई में जिंदगी लौट जाती है
अब तुम्हारी बातें और यादें ही है साथ
मिटा सकती नही ये जिंदगी
ये यकीन है मेरे पास
तुम्हारे न होने के एहसास से जब घबराता हूँ
आँखें बंद कर लेता हूँ और
सामने तुम्हारा मुस्कुराता हुआ चेहरा पाता हूँ
तुम्हारे होने के एहसास के साथ
निश्चिंत होकर उन यादों के साथ सो जाता हूँ
दर्द अपना बता सकता नहीं
यादें तुम्हारी भूला सकता नहीं
- निखिल कुमार
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