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तेरी ये अदा

omkumarom om

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गुड नाईट,
        
                                                    
                            
स्वीट ड्रीम, टेक केयर।
जब तक तेरे,
ये मेसेज आते हैं।
तब तक मैं,
सो चूका होता हूँ।
क्या करूँ?
दिन भर के कामों से,
इतना थका जो रहता हूँ।
और फिर सुबह,
मेरी क्लास जो रहती है।
उसके लिए उठना,
पड़ता है मुझे।
आप चाहे जितना भी परेशान,
रहती हो अपने लाइफ में।
फिर भी मुझे,
याद कर ही लेती हो।
यही बात मुझे,
तेरा दिवाना बनाती है।
अच्छा लगता है मुझे,
तेरी ये अदा भी।
रात के २ बजे होते हैं,
मैं तुझे रिप्लाई नहीं कर पाता।
पर सुबह तेरे ही मेसेजों से,
दिन की शुरुआत होती है मेरी।
अच्छा लगता है,
सच्ची, बहुत अच्छा लगता है मुझे।
जब कोई अपने चाहने वालों के,
वेल-विशेस की मेसेजों को पढ़ता है।
कल की कुछ,
आधी-अधूरी बातों को पढ़ता है।
और खुद ही खुद में,
हँसता है, मुस्कुराता है।
तेरे मासूम से चेहरे को,
याद करता है।
वो तो भूल ही जाता है,
अपने रब को, खुदा को।
और अपनी दिन की शुरुआत,
तेरी इसी मुस्कुराते चेहरे को,
देख कर करता है।
जैसे उसने खुदा की,
इबादत कर ली ।
उसके सजदे में अपना,
सर झुका लिया।
खुदा माफ़ करे मुझे,
तुम हो ही इतनी अच्छी।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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