पहला रंग जवानों को,
रक्षा में लगे दीवानों को।
होली तो उन्होंने खेली है,
दुश्मनों को मार भगाया है।
उनके ही लहू से.... ,
हाथों में रंग लगाया है।
देश सेवा में समर्पित,
भारत को मंहकाया है।
तोहफा दिया अपनों को,
निबटाया सब हैवानों को।
पहला रंग जवानों को,
रक्षा में लगे दीवानों को।
रंग रंग के फूल खिले,
बसंती रंग है छाया।
हो... हल्ला... चहुं ओर,
मस्ती का आलम छाया।
छोड़ अपने अरमानों को,
हर पल रंगों से सजाया।
निकल पड़े जांबाज,
छोड़ अपने घरबारों को।
पहला रंग जवानों को,
धरती मां के लालों को।
पं० चन्द्र दत्त शर्मा।
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