भूत घुसा है मेरे अन्दर, अन्दर बन बैठा वो बन्दर।
अलग अलग वो नाच दिखाता , तरह तरह के रंग बिखराता ।
देख तमाशा बन्दर का , कुछ तो ताल बजाते हैं।
कुछ तो दर्शक ऐसे भी हैं बन्दर पागल बतलाते हैं।
देख तमाशा बन्दर का , " नटवर" ने डोर संभाली है।
इधर उछल तू , उधर उछल तू , हाथ बाँध अब सीधा चल तू ।
सर पर टोपी अभी लगा ले, अब उठ जा , जा डमरू बजाले ।
जाकर दुलहिनीया संग अपनी, थोड़ा करतब दिखालें ।
ना मैं रोकू " नटवर " को , ना मैं टोकू बन्दर को ।
चुपचाप खड़ा मैं देखूँ , इस अन्दर के समंदर को ।
भूत घुसा है मेरे अन्दर, अन्दर बन बैठा वो बन्दर।
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