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हमसफर

pankhuri singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यूं ही नहीं हो तुम हमसफ़र मेरे 
        
                                                    
                            
तुम से दिल के तार जुड़े हैं मेरे
लभ पर हरदम नाम है तेरा 
दिल की धड़कन हो तुम मेरे
एक पल का भी चैन नहीं बिन तेरे 
ख्यालों में रहते हो तुम मेरे 
क्यूं रूठकर दूर चले गए हमदम मेरे
आ जाओ प्रीतम नहीं तो मर जाएंगे बिन तेरे 

स्वरचित - सरिता सिंह
 
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4 वर्ष पहले
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