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ग़ज़ल

Param Palanpuri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हथेली में हमीने जान रक्खी है,
        
                                                    
                            
कहानी जानकर अनजान रक्खी है।

हमें मिलना नहीं उनको यकीनन ही,
हकीक़त में पियाली ठान रक्खी है।

बना रक्खा सदा बेदाग जीवन को,
जवानी आज आलीशान रक्खी है।


जहर का मशवरा मत दो हमें यारो,
हकीमों की दवा पहचान रक्खी है।

हमें मजबूर मत कर सैफ होने से,
फकीरी शान -ए -सुलतान रखी है।

 परम पालनपुरी
गुजरात

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