हथेली में हमीने जान रक्खी है,
कहानी जानकर अनजान रक्खी है।
हमें मिलना नहीं उनको यकीनन ही,
हकीक़त में पियाली ठान रक्खी है।
बना रक्खा सदा बेदाग जीवन को,
जवानी आज आलीशान रक्खी है।
जहर का मशवरा मत दो हमें यारो,
हकीमों की दवा पहचान रक्खी है।
हमें मजबूर मत कर सैफ होने से,
फकीरी शान -ए -सुलतान रखी है।
परम पालनपुरी
गुजरात
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