इटली हो या अमेरिका,हर जगह कोरोना छाया है,
लाखो मौतो का इल्जाम,चीन के सिर पर आया है।
सैनिक मरे हमारे,आतंकी वहाँ ऐठा है,
पाकिस्तान भी मौज से,चीन की छ्त्र छाया मे बैठा है।
कटार मारी पीठ मे तुमने,भूमि हमारी हडपी है,
हमारे सड़क बनाने से, क्यू ह्रदय मे तुम्हारे कड़की है।
करके खुद को बंद,अंदर मद्मस्त बैठा है,
रोटी छिन लाखो की,कितने कत्ल कर बैठा है।
भारत की उड़ान से,क्यू चीन गरमाया है,
1962 नही है ये, समय 2020का आया है।
जब ललकारे कोई,प्रत्यंचा चढा लेनी चाहिए,
चीन को भी अब उसकी औकाद दिखा देनी चाहिए।
भारत ने भी आत्मनिर्भर होने का, बडा कदम उठाया है,
जिम्मेदारी का बेडा, अब उपभोगताओ प२ आया है।
ग्राहक भी कभी दुकानदार पर, कभी हावी हुआ है क्या,
जागो ग्राहक जागो,अभी भी समय नही हुआ है क्या।
Pinki(made in india)
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।