मेरी परेशानियों का भी हिसाब नही जनाब
गमो के गीत महफिल में गाना नही भूला।
छत से निहारता रहा तारों को रात भर मैं,
जो मिला था उस दर्द को छुपाना नही भूला ।
मैं ख़ुशी बांटता रहा हर किसी की दहलीज पर,
एक मेरा गम मुझे कभी रुलाना नही भूला ।
जिस ज़माने ने दिए थे मुझको गम बहुत सारे,
मेरी ही बेवकूफी है कि मैं वो जमाना नही भूला ।
-पीयूष धामी
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