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तुम्हारी मौजूदगी

Pooja Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारी मौजूदगी से ही मौन हो जाती हूं,
        
                                                    
                            
तुम हो कि हमें गंवार समझते हो।

तुम्हारी दूरी ही बेचैनी का कारण बनती है
तुम हो कि पागल समझते हो।

तुम्हारी नाराजगी भी मुस्कुराहट बन जाती है
तुम हो कि खुद को हमसे दूर समझते हो।

तुम्हारी प्यारी बातें मधुर गीत सा लगता है
तुम हो कि हमें बहका हुआ समझते हो।

तुम्हारे साथ बिताए पलों ने दिल धड़काया
तुम हो कि हमें दिल के मरीज समझते हो।

जब से तुम मिले कुछ और न चाहा
तुम हो कि हमें बदमिजाज़ नीरस समझते हो।
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4 वर्ष पहले
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