"तेरे चेहरे पे शायरी लिखूँ या लिख दूँ गज़ल कोई।
तेरी मुस्कान को बहार लिखूँ या लिख दूँ कमल कोई
तेरी अदाओं पे फ़िदा है ये जमाना सारा,
तेरी जुल्फ़ो को घटा लिखूँ या लिख दूँ बादल कोई।
यहाँ तो देखों हर कोई शिकारी है,2
तुझे पिंजरा लिखूँ या लिख दूँ जंगल कोई।
और सैयाद तो जुल्म ढ़ायेगा तुझपर "दीप"
तुझे बाज़ लिखूँ या लिख दूँ बुलबुल कोई।।
✍P Dahiya
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