वो उसे गजल कहता है और कमल लिखता है।
पानी सा कहता है फिर उसमें हलचल लिखता है।
दीवाना है वो उसकी आंखों का भी,
दिल को धड़कन कहता है फिर सभल लिखता है।2
और दूर तलक साथ चलता है उसके,
फिर दिल लिखता है और दिल को महल लिखता है।
वो खामोश आस्माँ को भी समझ रहा है धीरे-धीरे,
रात के आँसू ओस को भी जल लिखता है।।
प्रदीप दहिया