मेरे गमले के बुलबुल की एक कहानी है
उस प्यारी परिंदे की ,क्या रवानी है,?
उसका हर साल आना, टहल घूम कर वापस जाना
फिर एक रोज रह जाना, मेरे आंगन की निशानी ।
उड़ उड़ कर एक एक तिनका लाना,
जोड़ जोड़ कर आशियाँ बनाना
फुदक फुदक कर उड़ जाना,
यही काम हर रोज कर जाना।
एक समय वह भी आया,
हुआ आशियाँ बनकर तैयार
अब तो वह खूब फुदकती,
फुदक फुदक कर खूब चहकती।
अब तो रोज सुनाती,
मीठी मीठी गाना
मैं भी उसको दाना पानी देता,
वो अब मुझको बहुत ही भाती।
इस दुनिया मे आये उसके नन्हे मुन्हे बच्चे,
अब तो लड़ लड़ खूब शोर मचाते गाते
एक बच्चा गिरा धड़ाम से,
बिल्ली झपट गयी आराम से।
दुख के बादल छा गयी,
बेचारी बुलबुल उदास हो गयी
उसके बच्चे हुए जवान ,
बुलबुल फिर से मीठी मीठी गाना सुना गयी।
फिर से आंगन को चहका गयी ,
अपनी कहानी बता गयी
सुख दुख से ही रहना,
जीवन जीना सिखा गयी।
मेरे गमले के बुलबुल की एक कहानी है।
प्रदीप माझी(शिक्षक)
टांडा अम्बेडकर नगर
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