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दुनिया

Pranjali Awasthi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम जिस दुनिया में रहते हो
        
                                                    
                            
वो दुर्घटनाओं और आशंकाओं की अग्रजा है

जो अपने कमर पर
मरी हुई संवेदनाओं को बैठाकर
अढ़ाई कोस तक चली जाती है

जहाँ पर डर और वहम
भविष्य के लिए करूण कहानियाँ लिखते हैं

और संवेदनाऐं
मूक बधिर प्रशिक्षु की तरह
मौन साधती हैं

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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