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मेरे दोस्त

Pratibha singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कल्पनाओं में ही सही
        
                                                    
                            
पर तुम रोज आया करो
मेरे नजदीक बैठ कुछ तो गुनगुनाया करो
कभी तो तुम मेरी सुनो
और कभी अपनी भी सुनाया करो
आज बैठी अकेले तुम्हें सोचने यूंही
याद कर तुम्हें भीग आई है पलके
चुपके से मेरे एहसासों में आकर
तुम जरा गुनगुनाया करो
साथ सदा संग रहना जरूरी तो नहीं
दूर से ही सही अपनेपन का एहसास दिलाया करो ।
2 वर्ष पहले
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