कल्पनाओं में ही सही
पर तुम रोज आया करो
मेरे नजदीक बैठ कुछ तो गुनगुनाया करो
कभी तो तुम मेरी सुनो
और कभी अपनी भी सुनाया करो
आज बैठी अकेले तुम्हें सोचने यूंही
याद कर तुम्हें भीग आई है पलके
चुपके से मेरे एहसासों में आकर
तुम जरा गुनगुनाया करो
साथ सदा संग रहना जरूरी तो नहीं
दूर से ही सही अपनेपन का एहसास दिलाया करो ।