विज्ञापन

अंज़ाम ए बेकरारी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिला जो हादसा दिल ऐसा खराश हुआ मैं फूट फूट कर बिखर गया मगर तुझको न ऐतबार हुआ
        
                                                    
                            
तमाम उम्र तुमने मेरे खिलाफ साज़िश किया सितम ये कि बर्बाद हुआ मगर खुद न खबरदार हुआ
फितरत ही ऐसी कि शराफत की राह चलता रहा तेरी नीयत जानता था मगर तुझको न असर हुआ
तुम अपनी इनायतों से हमें बेखबर रहने दो ये जो आप सर झुकाए बैठे थे मगर हमको न खबर हुआ
हम आपके नाज़ उठाने खातिर सब्र किए बैठे हैं दिल भी अब तड़प रहा है मगर तुझको न असर हुआ
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

350 कविताएं

View Profile