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बेरहम मुकद्दर

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या पता था हमें वो दौर भी मेरी ज़िन्दगी में आएगा जब दिल मेरा खुशियों से रिश्ता तोड़ कर गमों में समा जाएगा
        
                                                    
                            
न हम आपके दिल में अा सके और न आपका निगाह परख सके मुझे मेरा ये सदा हर रोज याद दिला जाएगा
अभी ये जो हवा ए बहार गुजरी है मानों एहसास दिला रही है यादों का तूफ़ान आकर इसी तरह गुजर जाएगा
आज तेरी याद में बह निकले हैं जो आंसू वो शमा ए मोहब्बत के वक़्त इकरार ए वफा में शामिल हो जाएगा
हमने तो ज़िंदा रहने खातिर अपनी हसरतों के दाग़ आंसुओं से धो दिए सिर्फ ये सोच कर दिल तेरा पिघल जाएगा
जुबां पे आपका नाम बार बार अा रहा है भूले से कभी नाम मेरा याद करें तो जरूर मेरे दिल को सकूं मिल जाएगा
2 वर्ष पहले
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Rajiv Tyagi

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