आत्मीयता देश की,अकेलापन वहां का,
कोलाहल यहाँ का, शांति परदेश की,
सुनियोजित व्यवस्था है, जीवन वहाँ पर,
अफ़रातफ़री प्रणाली में , जीते यहाँ पर।
खुशी बसती है मन में, यहाँ या वहाँ पर,
मन लगाओ तो लगता, यहाँ और वहाँ पर,
दुनिया बन गयी है छोटी, यहाँ या वहाँ भी,
एकांकीपन बढ़ रहा है, यहाँ भी, वहाँ भी।
याद रखते बचपन के,घरौंदों का बनाना,
रूठना, मनाना, फिर मिलकर है खेलना।
परिवारों का मिलना, त्योहारों का मौसम,
बात करते बीत जाये , रात का भी अंधेरा।
फ़ेसटाइम मन लुभाता,यहाँ और वहाँ पर,
दूरियों को सिमटते , आभास हैं दिलाते,
बस सामने ही बैठे, सब स्वजन हैं हमारे,
बातें करते, ख़ुश होते,यहाँ और वहाँ पर।
जहाँ भी रहे हम, ख़ुशियों की हो बारिश,
मिलजुल कर, सजाये-सँवारे जीवन को,
ख़्वाहिश हमारी,सुधरे सिस्टम यहाँ की,
सुधारे ज़िन्दगी विज्ञान,यहाँ भी,वहाँ भी।
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