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बेरंग जिंदगी

prerna algure

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सूखे पत्ते,मुरझाये फूल,सुनी सी है उपवन।
        
                                                    
                            
कैसे बताऊँ तुझे,मेरे दिल का ये ख़ालीपन।
ना राग,ना प्रीत,ना द्वेष,ना कोई दुश्मन।
बेरंग हैं सारी खुशियां, बेसुरी है मेरी गीत!!

न त्योहारों का कोई मौसम,न मन में उमंग।
यूँ जलती है बस टूटती-फिरती सी उम्मीद।
गमों का सैलाब, ना सफर, ना कोई मंजिल।
बोझ तले सिर पर ,ये कैसी फूटी तकदीर !!
-प्रेरणा

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5 वर्ष पहले
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