सूखे पत्ते,मुरझाये फूल,सुनी सी है उपवन।
कैसे बताऊँ तुझे,मेरे दिल का ये ख़ालीपन।
ना राग,ना प्रीत,ना द्वेष,ना कोई दुश्मन।
बेरंग हैं सारी खुशियां, बेसुरी है मेरी गीत!!
न त्योहारों का कोई मौसम,न मन में उमंग।
यूँ जलती है बस टूटती-फिरती सी उम्मीद।
गमों का सैलाब, ना सफर, ना कोई मंजिल।
बोझ तले सिर पर ,ये कैसी फूटी तकदीर !!
-प्रेरणा
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