उसके नीले कमलनयन में..
डूब जाने को आतुर मेरा यह चंचल मन
सारे दिन एक गीत गुनगुनाता मेरा यह चंचल मन
हृदय की पीर सुनाने को आतुर मेरा यह चंचल मन
दर्पण को बार-बार निहारता मेरा यह चंचल मन
उसके खुले केश है या घने काले बादल ,
उन बादलों में खो जाने को आतुर मेरा यह चंचल मन
उसकी यादों में मन ही मन मुस्कुराता मेरा यह चंचल मन
- प्रिया सिंह (बनारसी)
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