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कोरे कोरे सपनें

punit kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी तारीफ मैं कैसे करूं मेरे सपनों ने मुझे बांध रखा है,
        
                                                    
                            
इन सपनों को संजोते संजोते मैं जीवन की राहें भटक गया,
अंतरात्मा से निकाल कर देखा तो मैं असल जिंदगी में पिछड़ गया।
कहूं कैसे मैंने कैसे - कैसे सपन सजा लिए,
रोज एक नई दुनिया रोज नए नए अरमान बसा लिए।
मेरे सपनों की कहानी भी अजीब है,
ना रातों का सुकून है ना चेहरे की जवानी रंगीन है।
मेरे अरमान मेरा विश्वास बांध देते हैं,
देखते-देखते मुझे सातवें आसमान अर बखान देते हैं।
एक गली निकलती है मेरे दिल से होकर जिसकी मंजिल मेरा मस्तिष्क है,
अफसोस बस इतना है उस गली के रास्ते में बैठा मेरा रकीब है।
वो रकीब बन के मेरे सपनों में आता है,
जबतक ना देख लू उसे अपने मन की आंखों से तबतक मेरा दिल बहुत घबराता है।
इन सपनों का आलम भी अलग सा है,चैन मेरा छीन लिया,दिल मेरा में लिया,
दिमाग से मेरे खेलते है, बस गहरी नींद में मुझे उड़ेल दिया।
वो नींद जो मैं लेता हूं उसका क्या हिसाब करूं,
पहर गुज़र जाती है रात की आगोश में अब लेटे लेटे कैसे इंसाफ करूं
कई बार सोचा है बीच सपनों में जाग कर देखूं कहां बैठा है ऐ रकीब तू,
कोशिश तो कर मेरे रूबरू होने की क्यों तड़पता है नींद में तू।
मैं,मेरी तमन्ना को जायज नहीं होने दूंगा,
वो ही तो एक जरिया है जिसके सहारे मैं ढेर सारे अरमान सजो लूंगा।
बेचैन हो उठता हूं कभी कभी ये सोच के,
स्वप्न बहुत रंगीन है जिंदगी बहुत फीकी है,
होता है क्यों अक्सर ऐसा क्या बाहरी दुनिया इतनी तीखी है।
हंसी झलकती है मुख से मेरे जब-जब अपना कोई मेरे स्वप्न में आता है,
मन करता है उम्र भर के थाम लूं वो पहर पर उस गहरी नींद से मेरा जी बहुत घबराता है।
क्या-क्या हो जाता है सपनों में, मैं कैसे बयान करूं,
बेजान बन जाता है ये शरीर मेरा, इस दर्द की किस हकीम से दरख़्वास करूं।
मेरे ये कोरे कोरे सपने मेरे जीवन को हसीन करना चाहते हैं,
परंतु मैं इस खौफ में रहता हूं क्या ये उम्र भर मेरे संग इसी गहरी नींद में रहना चाहते हैं
जब कभी इनमें से एक भी सपना जीवन मैं प्रतिरूपित होगा,
में वादा करता हूं उस दिन मेरा रकीब मेरे संग ताउम्र के बंधन में सूचित होगा ।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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