राज है गहरे इतने कि समंदर क्या है
खुश है बाहर से पर ये अंदर क्या है
इस जहां में शायद मुकद्दर ही इक जंग है
जीतने वाले को लगता है सिकंदर क्या है!!
हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।