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ज़िन्दगी

puru verma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िन्दगी भी कितनी अजीब होती है।
        
                                                    
                            
ना समझ आती है ना समझाई जाती है
जो समझ गया वो समझा नहीं पता
और जो ना समझा 
इस ज़िन्दगी में उलझ जाता है।
हर दिन की एक नई कहानी
हर कहानी में नई जिंदगी ।

पुरू वर्मा(अनिक)

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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