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शीत ऋतु

PUSHPA PANDEY

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शीत लहर
        
                                                    
                            
बढ़ती ठिठुरन
आशिक़ जन

शीत लहर
वरखा का कहर
अदा तुम्हारी

घन प्रचंड
बढ़ती ठिठुरन
कंबल धन

घना कोहरा
सूझते नहीं हाथ
अजब दृश्य

तिल रेवड़ी
बिकते हैं रेहड़ी
गजक मन

मटर ,आलू
छनते हैं समोसे
गरम चाय

बातें पुरानी
ये जोड़ते हैं रिश्ते
घर आंगन
Pushpa Pandey


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