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दौर ए सियासत

R Mohan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब विकास के मुद्दे पर
        
                                                    
                            
राजनेता ने कमर कसी हो

जब सियासत के चहरे पर
बेवजह ही एक हसी हो

जब छाती फाड़े वो
और दिल मे जनता बसी हो

गरीब की अंगुली में स्याही पर
बंद मशीनों में नेता की जान फसी हो

तो जान लो
सफेद कुर्ते में वो दिखने वाले है
मेरे शहर के कुछ मजबूर बिकने वाले है

संभाल के रखना वोटो की इन अमानत को
ये नोट तुम्हारे पास ज्यादा दिन नही टिकने वाले हैं

कोई खरीदे ईमान तुम्हारा तो बस इतना जान लेना
ये सियासत के लोग हैं खुद मुफ्त में बिकने वाले हैं

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