जब विकास के मुद्दे पर
राजनेता ने कमर कसी हो
जब सियासत के चहरे पर
बेवजह ही एक हसी हो
जब छाती फाड़े वो
और दिल मे जनता बसी हो
गरीब की अंगुली में स्याही पर
बंद मशीनों में नेता की जान फसी हो
तो जान लो
सफेद कुर्ते में वो दिखने वाले है
मेरे शहर के कुछ मजबूर बिकने वाले है
संभाल के रखना वोटो की इन अमानत को
ये नोट तुम्हारे पास ज्यादा दिन नही टिकने वाले हैं
कोई खरीदे ईमान तुम्हारा तो बस इतना जान लेना
ये सियासत के लोग हैं खुद मुफ्त में बिकने वाले हैं
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