शब्द क्यों निःशब्द हैं इस श्वास के मानव बता
बोल अब क्या रह गया कुछ पास हे मानव बता
क्यों पड़ा चुपचाप तुझको देख जग व्याकुल हुआ
क्यों लिया संसार से सन्यास हे मानव बता
कल तलक तो एक भी सपने अधूरे थे नहीं
आज उनमें से बता क्यो एक भी पूरे नहीं
क्यों रखा ये मौन का उपवास हे मानव बता
तू नशे में चूर था मदहोश था हर रास्ता
कल तलक तो था तुझे सारे जगत से वास्ता
क्यों नहीं अब आ रहा ये रास हे मानव बता
कैद था तू आजतक संसार कारगर में
तू फँसा था मोह में झूठे जगत के प्यार में
क्यों रहा तू दूसरों का दास हे मानव बता
महल बस्ती ये मोहल्ले ये शहर ये गाँव भी
है कहीं उद्यान उपवन तरुवरों की छाँव भी
बोल तेरा अब कहाँ आवास हे मानव बता
जान ले तू सत्य को वरना बहुत पछतायेगा
तू भी इस संसार से इक दिन विदा हो जायेगा
क्यों नहीं करता है अब विश्वास हे मानव बता
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