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अंतिम सत्य

Raghav Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शब्द क्यों निःशब्द हैं इस श्वास के मानव बता
        
                                                    
                            
बोल अब क्या रह गया कुछ पास हे मानव बता
क्यों पड़ा चुपचाप तुझको देख जग व्याकुल हुआ
क्यों लिया संसार से सन्यास हे मानव बता

कल तलक तो एक भी सपने अधूरे थे नहीं
आज उनमें से बता क्यो एक भी पूरे नहीं
क्यों रखा ये मौन का उपवास हे मानव बता

तू नशे में चूर था मदहोश था हर रास्ता
कल तलक तो था तुझे सारे जगत से वास्ता
क्यों नहीं अब आ रहा ये रास हे मानव बता

कैद था तू आजतक संसार कारगर में
तू फँसा था मोह में झूठे जगत के प्यार में
क्यों रहा तू दूसरों का दास हे मानव बता

महल बस्ती ये मोहल्ले ये शहर ये गाँव भी
है कहीं उद्यान उपवन तरुवरों की छाँव भी
बोल तेरा अब कहाँ आवास हे मानव बता

जान ले तू सत्य को वरना बहुत पछतायेगा
तू भी इस संसार से इक दिन विदा हो जायेगा
क्यों नहीं करता है अब विश्वास हे मानव बता

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8 वर्ष पहले
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