तन जलाती है गर्मी मन जलाती है हाला
घर के अंदर पड़े हैं सब लोग लगा हुआ है ताला
कोई कहता सरकारें सारी बैर कराती मेल कराती बस मधुशाला
मैं कहता कोविड के इस दंस से क्या बच पाएगा कोई पीने वाला
मंदिर मस्जिद सब बंद पड़े, खुली हुई है क्यूं मधुशाला।। १।।
भुखमरी से कुछ लोग हैं मरते कुछ पैदल नंगे पांव हैं चलते,
कुछ चलते चलते मौत से लड़ते कुछ पटरी पर हैं कटते।
मैं पुछूं या वो पूछे मेरे रब बता जो कोई पूछे-2
तू लेगा इसका जिम्मा या सरकारें देंगी हिसाब
कुदरत का कहर क्यूं इतना जारी था,
क्या गरीब ही धरती पर भारी था।।-2
कोई हो जो दे भर भर प्याला कहा है अब ऊपर वाला
मंदिर मस्जिद सब बंद पड़े खुली हुई है क्यों मधुशाला।।२।।
चोरी चुपके कुछ लोग हैं जाते, मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा,-2
बाहर निकलते जब डंडे पड़ते कहां है रे तू आला।
सीना तान के लोग हैं जाते मदिरालय, क्या इनसे ऊपर है मधुशाला-2
मंदिर मस्जिद सब बंद पड़े खुली हुई है क्यों मधुशाला।।३।।
कोई सुराही घर ले आता कोई बनाता उसमे हाला,
कुदरत के इस कहर से क्या बचा पाएगा कोई प्याला ।
ना कोई अपराधी ना कोई पापी फिर भी लगा हुआ है घर घर ताला ,
मंदिर मस्जिद सब बंद पड़े खुली हुई है, क्यूं मधुशाला।।४।।
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