आए वह बहार हो गई
हर तरफ पुकार हो गई
चाॅन्द बादलों में छिप गया
आज उसकी हार हो गई
माॅन्ग में चमक उठी किरन
चाॅन्दनी श्रृंगार हो गई
एक सांस और जी लिए
एक और उधार हो गई
जब भी तेरा नाम ले लिया
नाव नदी पार हो गई
तूने जो ग़ज़ल कही सबा
ज़िन्दगी का सार हो गई
राहिला हैदर-
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