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एक -तमाशा

RAHUL Nitin

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दुनिया एक तमाशा है
        
                                                    
                            
ये आशा और निराशा है
रंगीन खूब है लेकिन
कोई गाढ़ा कोई हल्का
दुनिया एक तमाशा है
फूल तो यहाँ खूब है
लेकिन सबकी अलग ख्वाइश
दुनिया एक तमाशा है
ये आशा और निराशा है
ये रंग मंच की दुनिया है
यहाँ रंग पहचान पाना भी है मुश्किल
दुनिया एक तमाशा है
ये आशा और निराशा है
यहाँ कोई किसी को रास्ता नहीं देता
सब एक दूसरे पर है भारी
दुनिया एक तमाशा है
ये आशा और निराशा है ॥॥



 हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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