आज भी पकड़ लेता हूँ माँ का आंचल
जब मैं डर जाता हूँ
आज भी माँ सहलाती है मेरे बालों को
जब मैं सो जाता हूँ
आज भी माँ बच्चों सा जिद करती हैं
मुझे खाना खाने को
आज भी माँ कहती है जल्दी आना
जब मैं बहार जाता हूँ
आज भी माँ खुद के हिस्से की रोटी बाँट देती है
कम खाकर
आज भी माँ मेरे बचपन की कहानी सुनती है
मेरे बच्चे को
फिर भी माँ मुझे बच्चों सा ही समझती है
माँ तो माँ है आज बहुत याद आती है माँ
माँ के बिना सिमट जाती है दुनिया .....
राजीव
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