कविता
माता के चरणों में तो
स्वर्ग का खजाना है,
प्यार तो है इतना
जिसका नहीं ठिकाना है।
जिसका नहीं ठिकाना
चेहरे पे इतनी है ममता,
आँखों में करुणा का जल
जो कभी न रुकता।
जो कभी न रुकता
देखा है सबने उसको,
वही तो हैं माता
पूजते हैं जिसको।
पूजते हैं जिसको
उसे कभी न भुलाना है,
एक शख्स मेरी माँ का
बस इतना ही फ़साना है ।
राजीव शर्मा लटेरी महाविद्यालय
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