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कब तक छुपाओगे

rajesh dube

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुन ले मेरी क़दमों की तू आहट
        
                                                    
                            
कि दीवारों के भी कान होते हैं

न झाँक कर देख मुझे झरोखे से
कि झरोखे से भी नैन चार होते हैं

मेरे नाम का ज़िक्र आते ही अक्सर
क्यूं तेरे रूख़्सार गुलाबी लाल होते हैं

हवाओं से तू करने लगती हैं बातें
जब हम तेरे आस - पास होते है

कब तक छुपाओगे दिल में मुहब्बत हमारी
कि तेरी हर अदा में हम इज़हार होते है

राजेश दुबे
बैंगलोर
2 वर्ष पहले
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