माँ की गोद क्यों सूनी है ………
बिलख रही है माँ आज तो
पिता कi सीना छलनीहै
टीस उठ रही सीने में
घर आंगन खली है
माँ चिल्लाती प्रद्युम सुन ले
तेरी रखी दूध की प्याली है
पापा बोले आजा बेटा
तेरे खेल खिलौने बाकि है,
गूंज रही थी किलकारी
उस नन्हे मुन्ने के आने से
आज रो रही दरों दीवार उसके घर से जाने से
आज उसे इन्साफ दिला दो
यही फरियाद हमारी है
माँ बाप का सीना छलनी है
माँ बाप का सीना छलनी है
- रजनी कपूर
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।