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बरसाने की ओर

Rakesh Malhotra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बरसाने की ओर, चलीं सज धज मुटियारें।
        
                                                    
                            
लठ मारें मुस्काय, बहें रंगों की धारें।
मनवा है मदहोश, पिया पर रंग बरसाए।
लाज शर्म सब छोड़, सजन को गले लगाए।।

- राकेश मल्होत्रा 'नुदरत'
 
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4 वर्ष पहले
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