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ग़ज़ल

Rakesh Malhotra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक्त ने जो भी दिये वह ज़ख़्म सारे भर गये
        
                                                    
                            
बीच मझंधारों के पलते हुमहुमाते तर गये

इश्क़ ने तौफ़ीक़ दी औ' हुस्न ने जादू किया
दिल में इक उम्मीद ले कर हम भंवर भी तर गये

धूप छाओं का सफ़र था लौट कर ख़ाली चले
एक मुद्दत हो चली उस पार अपने घर गये

कम नहीं थे दिल दुखाने चोट खाने के सितम
द्वार दाता के रहे औ' ज़ख़्म सारे भर गये

कष्ट, उलझन से भरे थे जिंदगी के रास्ते
आ के उल्फ़त की गली हर बात हम सर कर गये

- राकेश मल्होत्रा 'नुदरत'
2 वर्ष पहले
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