ऐसा गणतंत्र हो
भूख से स्वतंत्र हो
प्रश्न न ज्वलन्त हो
पापी क्यों महंत हो
जो भी दीन-हीन हों
उनके लिए तंत्र हों
ऐसा गणतंत्र हो
भूख से स्वंतंत्र हो।
लाचारी बेकरारी का
धृष्ट मुकुटधारी का
भविष्य कारी-कारी का
कर दो आज अंत हो !
ऐसा गणतंत्र हो
भूख से स्वंतंत्र हो।
ध्वज फहराने वालों
तिरंगा लहराने वालों
वृद्ध-बाल-नारी अपने
देश के सशक्त हो
ऐसा गणतंत्र हो
भूख से स्वंतंत्र हो।
युवावों में तरंग हो
स्वस्थ अंग-अंग हो
जाति का न दंश हो
राष्ट्रवाद यंत्र हो
ऐसा गणतंत्र हो
भूख से स्वंतंत्र हो।
मार्ग गड्ढे मुक्त रहें
पर्यावरण शुद्ध रहे
पेंड़-पौधे-पुष्प सभी
सुलभ यत्र - तत्र हो
ऐसा गणतंत्र हो
भूख से स्वंतंत्र हो
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