तलाश..
काश …
आस…
प्यास …
आभास
एहसास
हर शह है ख़ास
उसके दिए लिबास
क्या वास , कैसा निवास
ना बैर , ना खटास
क्यूँ उदास
जीवन क्षणभंगुर
हास- परिहास , हो उल्लास
अटूट विश्वास
वो है ना ,आसपास
सिर्फ़ उससे मिलन की आस
अंत एक ,होना है इक दिन ….
राँझना
खारघर, नवी मुंबई