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एक ही अंत

Ranjana Sood

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तलाश..
        
                                                    
                            
काश …
आस…
प्यास …
आभास
एहसास
हर शह है ख़ास
उसके दिए लिबास
क्या वास , कैसा निवास
ना बैर , ना खटास
क्यूँ उदास
जीवन क्षणभंगुर
हास- परिहास , हो उल्लास
अटूट विश्वास
वो है ना ,आसपास
सिर्फ़ उससे मिलन की आस
अंत एक ,होना है इक दिन ….

राँझना
खारघर, नवी मुंबई
3 वर्ष पहले
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