वो आंखों की नमी थी
नन्हा सा प्यार था
रब की दुआओं से
मां का सच्चा प्यार था।
अगर मां न होती
तो जग भी सुना होता
और हम न होते तो
देश का चिराग ना होता।
जन्म जब दिया जब उस मां ने
आंचल में रहने को सिखाया
खुद न सो सकी रात भर
हर दुख से मुझे बचाया।
जब कभी नींद न आती थी
लोरी गा गा कर सुनाती थी
प्यार की नन्ही राहों में
मां ही मां याद आती थी
कुछ समय पश्चात
जिस मां ने 9 महीने रखा पेट में
उसका कोई न मोल है
चार दिन की चांदनी क्या आ गई
सब कुछ उसका बोल है
जिस मां की सेवा करनी थी
वो नन्हीं परी करवा रही
यही तो जिंदगी का मोल है साहब
मां की जगह नन्ही परी याद आ रही।
नाम रत्नेश मणि
कामदेवपुर अमरपुर बांका
बिहार 813101
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