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तन्हाई

Ravi Pande

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तन्हाई में कुछ इस कदर समय बर्बाद किया
        
                                                    
                            
कुछ अन्तर्मन को कुरेदा कुछ तुम्हें याद किया

मैं तो निकला था जमाने से लोहा लेने
पर मुझको खुद अपनो ने बर्बाद किया

आज के दौर में दुनिया में बड़ा नाम उनका
बेचकर अपना जमीर जिसने घर आबाद किया

खुद की बनाई बंदिशों में बंध के मत रह जाना ' रवि '
रौशन वो हुआ जिसने स्वयं को सीमाओं से आजाद किया

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले
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