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जीवन का सार

Ravindra Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सांसों की सरगम तन का श्रंृृृगार
        
                                                    
                            
सीने की धड़कन जीवन का सार,
तुझसे जुदा होके कर जाऊँगा
खुद से वफा भी न कर पाऊँगा।
मुमकिन नहीं जो तुझे भूल जाऊँ
ख्यालों में अपने कोई और लाऊँ,
लगता नहीं मन है छाया खुमार
हसरत हो तन की दिल का करार।



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6 वर्ष पहले
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