कुछ किस्से लिखूंगी, कुछ हिसाब लिखूंगी।
अभी मसरूफ हूं, एक दिन तुमपे मैं पूरी किताब लिखूंगी।।
हर एक लम्हें को, एक एक साल लिखूंगी।
तुमको फरिश्ता खुद को आम इंसान लिखूंगी।।
कुछ सवाल लिखूंगी, कुछ जवाब लिखूंगी।
तुम्हारे साथ अपनी हर शाम लिखूंगी।।
कुछ नज्ब लिखूंगी, कुछ ग़ज़ल लिखूंगी।
तुम्हारी आंखों की गहराइयों पे आफताब लिखूंगी।।
खुद को हुस्न की मलिका, तुम्हें अपना नूर लिखूंगी।
मैं तुम्हारी चांदनी और तुम्हें अपना चांद लिखूंगी।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।