जब-जब पिता की याद आयी
आँख मेरी भर आयी l
माना की पिता की कमी पूरी नहीं कर सकता कोई
पर उनके जाने के बाद माँ की चुप्पी भी देखी नहीं जाती l
माँ की हसीं सुने हुए बीत गए कई बरस
अब तो माँ की आवाज़ सुनने के लिए कान भी गए तरस l
पिता के इर्द-गिर्द ही बच्चो की ज़िन्दगी की धूरी
पर पिता के जाने के बाद माँ भी लगने लगी है थोड़ी सी अधूरी l
माँ ने इतने साल हमे है संभाला
अब हमने भी तो अपना फ़र्ज़ है निभाना
उन्हें उनके हिस्से का प्यार है लौटाना l
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