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गजल

Rohit Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर वक्त तेरी बातें तेरी यादें दिल पर तेरा कब्जा लगता है,
        
                                                    
                            
यकीनन तुमसे प्यार है मुझको और वो भी सच्चा लगता है |

तुम मुझसे जियादा झूठ ही बोलते हो ये जानता हूँ मैं,
पर जब तुम पास होते हो झूठ भी सच्चा लगता है |

तुम जब भी दूर होते हो हमसाये से भी डर लगता है,
यही जब तुम साथ होते हो तो सब अच्छा लगता है |

किताबों की तरह बहुत से अल्फाज हैं दिल में,
तुम्हारी जुल्फ लहराने से पेज दर पेज खुलने लगता है |

यकीन करो जल्दी से किसी को मुंह भी नहीं लगाता,
यही जब तुम से गुफ़्तगू होती है तो अच्छा लगता है |

तू जब भी देर से आता है मुझसे नजरें चुराता है,
तेरा डर डर के मुस्कराना मुझे अच्छा लगता है |

जुस्तजू थी जिसकी 'रोहित' अब तुझको मयस्सर है,
किसी और की तलाश फिजूल जब वो ही अच्छा लगता है |

 रोहित सिंह (सुलतानपुरी)

मयस्सर- प्राप्त
गुफ़्तगू- बातचीत
अल्फाज- शब्द
कब्जा- अधिकार 


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6 वर्ष पहले
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