अश्क नहीं खून.....
आंखों से खून तभी बहा करते है
जब अश्क बहना बंद कर देते है।
जख्म देने वाले कोई दुश्मन नहीं
बल्कि वो कोई अपना ही रहते है।
अपनी खुशी के लिए घर ही नही
पूरा संसार ही जला दिया करते है।
हम उसे अपना कहते थकते नहीं
वो मौत के करीब ला दिया करते है
पत्थर महलों को तोड़ा नही करते
उछलने वाले कोई अपना ही होते हैं।
© रूपक
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