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लश्क़र देखो

S K

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रब को भी ऊपर देखो
        
                                                    
                            
अपने भीतर डर देखो

मंदिर में है बैठा रब
मत उसको पत्थर देखो

रातो दिन सड़कों पर अब
चलता यह लश्कर देखो

अपने अपनों से घायल
सीने पर खंजर देखो

लोग घरों में छिपते हैं
दहशत का मंजर देखो

हाल बुरा कोरोना से
बंद सभी दफ्तर देखो

रोटी को तरसें बच्चे
कंगालों का घर देखो

आँसू सूखे आँखों के
बस खारा सागर देखो

नदियों की कल-कल-सा अब
बहता यह निर्झर देखो

डा. सुनीता सिंह 'सुधा'
वाराणसी
3 वर्ष पहले
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