समाज की नैतिकता दिन ब दिन गिरती जा रही है
खून के रिश्ते हों या सामाजिक रिश्ते
सब बिखरते जा रहे हैं
क्यों ? क्यों अब व्यक्तिवादी सोच
और उससे उत्पन्न आधुनिक विचारों की संकीर्णता
हमारे हर रिश्ते को अविश्वास की भट्ठी में झोंक
रहे हैं
हम कैसे समाज का निर्माण कर रहे हैं
जिसमे माता पिता अपने ही संतान पर भरोसा
नहीं कर पा रहे हैं
हमारी गिरती नैतिकता और उससे उत्पन्न खालीपन
हमारी सभ्यता संस्कृति को नष्ट कर रही है ।