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कंटीले हाथ

Sai Smita

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भगवान बचाए इन कंटीले हाथों से,
        
                                                    
                            
इन चुभनों से,
इन नासूर दर्दों से।

मुंह में मुस्कान चढ़ाएं,
दोस्ती का ढोंग रचाए,
कंटीले हाथ बढ़ाएं।

बैठे हैं घात लगाए,
अपनेपन का मायाजाल बिछाएं,
कब वार करें राम जाने।

भगवान बचाए इन कंटीले हाथों से,
इन चुभनो से,
इन नासूर दर्दों से।।

-स्मिता पाल (साईं स्मिता), झारखंड 

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