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"नारी" सबसे न्यारी

Sakshi Agarwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            "नारी"
        
                                                    
                            

एक मर्द के अस्तीत्व को पहचान दिलाती नारी है,
काँच की सतह जैसी पारदर्शी नारी है।
प्राणदायिनी, जननी एक नारी है,
गंगा, गीता जितनी पवित्र एक नारी है।
ईश्वर की सबसे खूबसूरत रचना नारी है,
गुस्सा करने में जो हर एक पर पड़े भारी वो एक नारी है।
सूनी हो हर राह मगर मैं ना घबराऊ ,
गंदी नीयत से राह में ना घेरी जाऊं।
हर एक के मन में बेटी सा सम्मान पाऊँ,
बेडर हो अपने घरों से बाहर निकल पाऊँ।
किसी मासूम को बेइज्जत करने वाला ना कोई शैतान हो,
और हो नीयत जिसकी ऐसी उसको फांसी सरेआम हो।
माईका और ससुराल की पहचान एक नारी है,
परिवार के वंश को आगे बढ़ाती एक नारी है।
बेटी हूँ इसलिए मुझे भ्रूण में मत मारो,
दहेज के लालच में किसी नारी को ना दुत्कारो।
 
एक वर्ष पहले
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