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लैम्प पोस्ट

Salil Saroj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं चौराहे के कोने में खड़ा
        
                                                    
                            
लैम्प पोस्ट हूं,
मुझे रात के अंधेरे में
सब कुछ साफ साफ दिखता है।
चमचमाती गाड़ियों में बहकती रईसी,
नियोन लाइट में बिकता हुआ जिस्म का लोथरा,
फुटपाथ पर थक कर सोया हुआ मेरा देश,
सिगरेट और शराब की दुकान पर जवान होता बचपन,
कुत्ते के पेट से चिपक के सोया हुआ"छोटू",
पेट की खातिर नींद बेचता हुआ निरीह दरबान,
घर की तलाश में वृन्दावन की झल्लाई हुई बुढ़िया,
रात की चादर से पैर पसारता हुआ डर,
सयानी बेटी के घर आने के इंतज़ार में परेशान बाप।
इंसान की छाती पर पैर पसार के सोया हुआ हैवान।

तुम ये सब क्यों नहीं देख पाते?

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8 वर्ष पहले
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